Description
शायद ये कहानियाँ न होते हुये जीवन की वास्तविक घटनायें ज्यादा हैं। मेरी संवेदनशीलता ने ऐसी घटनाओं को थोड़ा सा मोड़ देते हुए कहानी के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास तब किया था जब मेरे जैसे काम में डूबे रहने वाले व्यक्ति के पास आफिस में कोई कार्य ही नही था। मैं तो जीवन को दूब घास की तरह मानता हूँ जिसको कोई काटे, उखाड़े या फिर जला दे, वह पानी की पहली बौछार के साथ ही फिर हरी हो जाती है। मेरी ये सभी रचनायें पूर्व में प्रकाशित हो चुकी हैं जो पाठकों द्वारा बेहद सराहीं गयीं। आशा है कि 'पोथी.कॉम' के माध्यम से इनको पाठकों का विस्तार मिलेगा।
मैं यह पुस्तक अपनी 'इजा' को समर्पित करता हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि अगला जीवन भी उनके पुत्र के रूप में ही प्राप्त हो।
