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5
बस यूँ ही. . .

बस यूँ ही. . .

ग़ज़लें

by रौशन जसवाल विक्षिप्‍त (1 review, add another)
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
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Description of "बस यूँ ही. . . "

बस यूँ ही ... मेरी काव्य रचनाओं का संग्रह है । आप यूँ समझें कि इधर-उधर बिखरी पड़ी काव्य रचनाओं को सहेज कर रखने का एक प्रयास मात्र है।

About the author(s)

रौशन जसवाल विक्षिप्त

जन्म : 1963
शिक्षा : एम0ए0, एम0एड0
सम्प्रति : हिमाचल प्रदेश उच्चतर शिक्षा विभाग में अध्यापन।
प्रकाशन – अपने बारे में कुछ भी खास नहीं है, बस आम और साधारण ही है। साहित्य में रुचि है। पढ़ लेता हूँ, कभी-कभार लिख लेता हूँ। कभी प्रकाशनार्थ भेज भी देता हूँ। 1986 से यदाकदा प्रकाशित, प्रसारित और छिट पुट संकलित, पुरुस्कृत। लघुकथाओं पर साहित्य श्री, शकुंतला स्मृति सम्मान, रम्भा श्री प्राप्त। आकाशवाणी शिमला और दूरदर्शन शिमला से नैमितिक सम्बंध रहा ।
काव्‍य संग्रह ननु ताकती है दरवाजा प्रकाशित ।
तलाश काव्‍य और लघुकथा संग्रह, अम्‍मा कहती थी काव्‍य संग्रह का सम्‍पादन ।
ब्लॉ ग : www.roshanvikshipt.blogspot.com

roshanvikshipt@gmail.com

Book Details
ISBN: 
9789352680207
Publisher: 
HIMDHARA
Number of Pages: 
80
Dimensions: 
5 inch x 8 inch
Interior Pages: Black & White
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)
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Reviews of "बस यूँ ही. . . "
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Re: बस यूं ही by himshiksha
10 May 2016 - 9:05pm

अच्‍छा है । कवितायें अच्‍छी है । कवितायें पुरानी है नवीन कवितायें पढ़ने की इच्‍छा है । इस संकलन में सभी रचनायें अच्‍छी है लेकिन कुछ कवितायें बेहद प्रभावित करती है । लेखक को बधाई ।

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