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विश्व के गूढ़ प्रशनों की व्याख्या-TERTIUM ORGANUM HINDI

विश्व के गूढ़ प्रशनों की व्याख्या-TERTIUM ORGANUM HINDI

by P.D.Ouspensky,Mr.Musanni Singh Lodhi[TRANSLATOR) (write a review)
Type: Print Book
Genre: Philosophy, Religion & Spirituality
Language: Hindi
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Description of "विश्व के गूढ़ प्रशनों की व्याख्या-TERTIUM ORGANUM HINDI"

वस्तुओं का उभार और हमारा उन्हें देखने का दृष्टिकोण इनके द्वारा हमारी आँखों से हमें वस्तुओं का विकृत रूप दीखता है .यह एक दृष्टि सम्बन्धी भ्रम है ,एक दृश्य सम्बंधित छल। एक घन यथार्थ में तीन आयामी घन का एक औपचारिक चिन्ह है और हम जो कुछ भी देखते है वह सब औपचारिक आकृतियाँ है यह उस पारंपरिक तीन आयामी जगत की आकृतियाँ है जिनका की हमारी ज्यामिति रचना करती है .इनका वास्तविक जगत से कोई सम्बन्ध नहीं है .हम जो कुछ भी देखते है उस के आधार पर अनुमान लगा सकते है की वास्तव में वहां क्या है .हम जानते है की जो हमें दिखता है वह गलत है और हम यह सोचते है की विश्व उस प्रकार से अलग है जैसा की हम इसे देखते है इसके विपरीत अगर हमें जो हमने देखा है उस पर यदि कोई शंका नहीं है और अगर हम यह सोचते है की विश्व वैसा ही है जैसा की हम इसे देखते है तब यह तर्क इस आशय पर आधारित होता है की हम उस प्रकार से सोचते है जिस प्रकार से की हम देखते है और आदतन हम उसमे लगातार सुधार लाते रहते है जो की हमने देखा होता है .
आँखों द्वारा जो देखा जाता है उस में सुधार लाने पर यह आवश्यक रूप से अवधारणा को जन्म देता है , तर्कों के द्वारा सुधार किया जाता है जो की अव धारणा के बिना संभव नहीं है .आँखों के द्वारा जो देखा गया है यदि उस में सुधार न किया जाए तब विश्व हमें एक बिलकुल अलग रूप में प्रकट होगा [वह जो की वास्तव में अस्तित्ववान है और जिसे की हम गलत ढंग से देखते है .]ऐसा बहुत कुछ है जो की वास्तविक रूप से अस्तित्ववान है जिसे की हम कभी नहीं देख पाते और इस के अतिरिक्त हम जो वास्तव में अस्तित्ववान नहीं है उसे देखते है .जिसमे पहले तो हम बहुत सारी अवास्तविक गतियों को देखते है जिनकी हम प्रत्यक्ष अनुभूति करते है हमारी प्रत्येक गति उस प्रत्येक से जुडी रहती है जो हमारे आस पास है .हम जानते है की यह गति भ्रमात्मक है परन्तु हम इसे वास्तविक मानकर देखते है हमारे पीछे वस्तुएं स्थूल रूप से गुजरती है और एक दुसरे के आगे निकल जाती है अगर हम धीमी गति से गाड़ी चला रहे होते है तब धीरे धीरे घर पीछे छुटते है .और अगर हम तेज गति से चलाते है तो सब कुछ तेजी से गुजरता है ,तब पेड़ तत्काल उत्पन्न होते है और गायब हो जाते है

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Book Details
Number of Pages: 
188
Dimensions: 
A4
Interior Pages: Black & White
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)
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