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फासलें और भी हैं

फासलें और भी हैं

by Shiv Kumar "Sahil" (1 review, add another)
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
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Description of "फासलें और भी हैं"

फासलें और भी हैं .........
एहसास जब अश्यारोँ में बयां होते हैं तो उन एहसासों की एक अलग दुनिया , एक अलग चेहरा , एक अलग सन्देश सामने आता हैं ! इस किताब में आपको कुछ ऐसे ही सन्देश गज़लों की शक्ल में मिलेंगे ! ग़ज़ल इक सुंदर एहसास हैं इसमें शिकायत , प्रेम , निराशा , खुशी , दर्द , यादें और जिन्दगी का हर रंग मिल जाता हैं ! इस किताब में ऐसे कई रंग हैं , लेखक नें शुरू में ही बड़ी सुंदर बात कही हैं ......

"उनका हंसना मोहब्बत नहीं थी साहिल
तेरे हशर का अंदाजा उन्हें पहले से ही था" !

About the author(s)

Shiv Kumar "Sahil", 22 years, is a Clerk by profession in Govt. of Himachal Pradesh Irrigation & Public Health Department. This is his first book and he can be reached at shayariorsahil@gmail.com

Book Details
Number of Pages: 
164
Dimensions: 
6 inch x 9 inch
Interior Pages: Black & White
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)
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Reviews of "फासलें और भी हैं"
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Re: फासलें और भी हैं by roshanjaswal
18 May 2016 - 8:35pm

आपकी ग़ज़लें पढ़ी शानदार है आपको साधुवाद। आप हिमाचल से हेैं जानकर अच्‍छा लगा । आशा है आपसे जरूर मुलाकात होगी । पुन: आपको बधाई और साधुवाद।

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