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आश्रम

आश्रम

by मनोज राय (write a review)
Type: Print Book
Genre: Pets
Language: Hindi
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Description of "आश्रम"

मिनी के मिलने से पहले मुझे कुत्तों से बहुत डर लगता था।
2012 की खत्म होती हल्की सर्दियों में मिनी मिली।

और उसी के साथ शुरू हुआ मेरा एक नया जीवन।
उसी साल मिक्की मिला..और ज़िंदगी में खुशहाली बढ़ती गयी।

2013 में बाबा, उनके सात कुत्ते कालू, छोटी, लल्लू, मुनिलाल, चीकू, छोटू, गोलू और एक मोटा बिल्ला चुनीलाल, और मिनी और मिक्की के साथ आश्रम की शुरुआत हुई थी।

साल 2014 की तपती गर्मियों में मिक्की की अचानक हुई मौत ने मुझे अंदर तक तोड़ दिया।

राह चलते हर लंबे मुँह वाला कुत्ता मिक्की दिखता था।
आसान नहीं होता ऐसे एकदम से साथ छूट जाना।

मुझे टूटना नहीं था..मैं आश्रम के बच्चों के साथ बिताया हुआ समय याद रखना चाहता था..वो मीठी यादें थीं..वो दुखदायी भी थीं, पर मीठी यादें थीं।

मैं उनकी फोटो खींच कर रखता..देर देर तक देखते रहता।
मैं उन यादों को लिख कर रखता..बार बार पढ़ते रहता।
मैं आश्रम के बच्चों की तरफ देखता।
ये कितने खुश हैं..
वो जिनमें से कितनों ने अपनी माँ की शक्ल भी नहीं देखी।
वो जिन्हें मैंने अपनी हथेली पर सुला कर बोतलबंद दूध पिलाया..उनको बड़े होते देखना..उनको मरते हुए देखना।

मैं सब कुछ लिख लेता था।

मैं चाहता था लोग पढ़ें।
मैं चाहता था वो लोग जिनके लिए जानवर कोई मायने नहीं रखते, उनमें थोड़ी संवेदना पैदा हो।

मैं चाहता था कि वो लोग जानें जिन्होंने सब कुछ छीन लिया जानवरों का।
जो उन्हें अपने बीच उन्हें देखना भी पसंद नहीं करते।
मैं चाहता था वो समझें कि इस धरती पर सबका उतना ही हक़ है जितना इंसानों का।

मेरी प्रेमिका को बहुत चाह थी मैं एक किताब लिखूँ।
मुझे लिखना तो आता था, पर सिर्फ कहानियाँ..किताब नहीं।

मैं छोटी छोटी कहानियाँ लिखता था..कभी कभी कुछ कविताएं, अपनी प्रेमिका के लिए।

एक दिन मैंने सोचा, अपनी प्रेमिका की चाह पूरी करना दोतरफा सुख है।

पर मुझे किताब लिखने का ज्ञान नहीं था।
लिहाज़ा मैंने अपनी उन कहानियों को ही रूप दे दिया किताब का।

वो कहानियाँ जिन्हें लिखते वक्त मैं रो भी दिया करता था।
ये कहानियाँ खट्टी मीठी, कड़वी, दुखद सुखद यादें हैं उन सबकी जिन्हें समाज निरन्तर दुत्कारने में लगा है।

यह किताब एक क्षमायाचना है उन समस्त जीवों से, जिन्हें इंसानों से सिर्फ दर्द मिला है।

यह किताब एक प्रयास है लोगों को जागरूक करने का..कहानियों के माध्यम से।

यह किताब आवाज़ है जीवों की।

सुनने के लिए शुक्रिया।

Book Details
ISBN: 
9781393239857
Publisher: 
BookLeaf Publishing
Number of Pages: 
585
Dimensions: 
5.5 inch x 8.5 inch
Interior Pages: Black & White
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)
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