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जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक

जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक

by रजनीश कान्त (write a review)
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
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Description of "जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक"

यह मेरा पहला कविता संग्रह है। जैसा मैंने अनुभव किया और जिस तरह
से संघर्ष करके लोगों को कामयाब होते देखा, उसे ही मैंने कविता का
रूप दे दिया। हर इंसान हर पल कुछ न कुछ अनुभव हासिल करते
रहता है। उसका अनुभव बहुत कुछ उसके आसपास के माहौल पर,
उसकी सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि पर निर्भर करता है।
इंसान का अनुभव ही इंसान की सोच तय करता है।

About the author(s)

बिहार के गया जिले के पिछड़े इलाके अमौखर गांव में मेरा जन्म हुआ।
शुरुआती शिक्षा और दसवीं तक की पढ़ाई मैंने अपने गांव में रहकर ही
सरकारी स्कूल से पूरी की। कैरियर की शुरुआत मैंने एक हिन्दी प्रतियोगिता
मासिक पत्रिका से की। कई न्यूज चैनलों में अलग-अलग पदों पर काम
किया। मैंने ईटीवी से न्यूज चैनल में अपना कैरियर शुरू किया। फिलहाल
ब्लॉगर, स्वतंत्र पत्रकार, रचनात्मक लेखक और अनुवादक के रूप में
कार्यरत।

Book Details
Publisher: 
Pothi.com
Number of Pages: 
112
Dimensions: 
5 inch x 7 inch
Interior Pages: Black & White
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)
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