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अंजन
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
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Description of "अंजन"

काजल और अंजन के द्वारा नेत्रों में श्यामता ,विशालता एवं प्रभावपूर्ण कटाक्ष उत्पन्न किया जाता है |
इसी शब्द पर आधारित है यह कविता संग्रह ‘अंजन' कुछ दिल से….

यह संग्रह जीवन,आत्म-विस्वास ,जिंदगी ,प्यार ,बेवफा,दोस्त,गाव,यादें,धोखा और आस जैसे बिन्दुओं आधारित है | अधिकाँश रचनाये बाकी रचनाकारों की तरह इश्क परस्त हैं इसलिए उनमें आपको यादें, रातें, नींद, ख्वाब, तनहाई, अँधेरा, उदासी तो मिलेंगी ही साथ ही ज़माने के बारे में भी विचार देखने को मिलेंगे!
सोचते है जाने से पहले लोगो की सोच बदल जाये,
जिंदगी के किस्तों का हिसाब हम भी रखते है |
हम वो नही जो वक्त के साथ, अपने रिश्ते बदल जाये ,
दिल से रिश्तो को निभाने का रिवाज हम भी रखते है ||

बेवफाई और गम हर इन्सान का अभिन्न अंग रहा है
सब कुछ था लाश में बिना दिल के
शायद जीवन भी प्यार में कम गया
बिछड़ने का आँखों में अहसास था
अंजन वो जब दूर गया नम गया

रचनाकार ने अपने अनुभवों को,अपमी संवेदनाओ को और अपने मन की कसक को बड़ी सहजता के साथ व्यक्त करने की कोशिश की है,

हम पर तिरछी नजर रहती है सबकी
क्यों डरे, हम थोड़े किसी की जागीर हैं
थोडा ही लिख पाते है और क्या करें
हम अंजन हैं ,थोड़े ना कोई मीर हैं
सरल,सहज भाषा में लिखी गई पंक्तियाँ हर किसी के दिल को छूने की कोशिश करती हैं |

About the author(s)

विवेक अंजन श्रीवास्तव शिक्षाः B.E.(Hons.)Computer Science, MBA (HR) विधाः गीत, कविता, ग़ज़ल, समीक्षा लेख।
रुचि: कविता के अतिरिक्त संगीत से प्रेम । जन संपर्क, इन्टरनेट और ब्लोगिंग में विशेष रूचि |आत्मकथ्य : अपने बारे में, अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में हमेशा परेशानी होती है। सलाह अच्छी देता हूं, राजदार अच्छा हूं, इसलिए कुछ लोगों के अंतरंग का गवाह हूं। किताब, क्रिकेट, सिनेमा, नाटक, संगीत और प्रेम में गहरी दिलचस्पी है।उम्र में बडो की संगती भाती है। जो लोग मुझ नहीं पहचान पाते है, उनके लिये रुड, घमंडी, एरोगेंट हूं। अपने इर्द गिर्द एक दीवार बनाये हुए हूं जिसमे घुसने की इजाजत कुछ ही लोगो को है। अगम्भीर किस्म का गम्भीर इन्सान हूं। जिस काम में मजा नहीं आता उसे नही करता |
Website: www.vivekanjan.com

Book Details
Number of Pages: 
55
Dimensions: 
A5
Interior Pages: Black & White
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)
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Reviews of "अंजन"
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Re: अंजन by vipinmohit
2 April 2012 - 7:20pm

Aao ek sataranj bichaye, phir se ek sapna sajaye
phir na ude koi parinda, aisa ek angana banaye

Dosti-yaari, duniya-daari, ab hum samaj chuke hai
main kya hu kya hovunga, chalo apne ko samjae

Jo na tha apna kabhi, na hoga apna kabhi
nahi aayega lotkar kabhi, chalo usko bhul jaye

Lad raha tha jamane se, ab apne se ladna hoga
zazzbat kuch naye laye, naye sapno ki kopal sajaye

Main chala ja raha tha, jivan ke gud ko bina khaye
rishte jo tut gaye hai, unhe ek baar phir se manaaye

Soo raha tha kab se, ab madhur nind se khud ko jagaaye
sapne jo piche chut gaye hai unhe ek baar phir se sajaye

Dost kahta tha khud ko, par muje padh na saka
"Anjan" kuch aisa likh ki sare jamane ko padhaya jaye

Re: अंजन by Bhaskar Shukla
20 March 2012 - 2:26pm

सब कुछ था लाश में बिना दिल के
शायद जीवन भी प्यार में कम गया
बिछड़ने का आँखों में अहसास था
अंजन वो जब दूर गया नम गया

awsm saying...........
every line say something about your life,love,emotions ,frndship.............................................every thing in this book..............

Re: अंजन by abhijeetlutade
20 March 2012 - 2:22pm

The Book is really excellent from the Cover to last page.
Various situations and incidence of life are well explained in simplified words.
Congrats...for this great work !
&
Best wishes for the future creativity !

Regards,
Abhijeet Lutade

Re: अंजन by RishiKesh Pandey
20 March 2012 - 2:17pm

उनकी आँखों से काश कोई इशारा तो होता
कुछ मेरे जीने का सहारा तो होता
तोड़ देते हम हर रस्म ज़माने की
एक बार ही सही उसने "अंजन " पुकारा तो होता !!

must read @@@ANJAN kuch dil se.....!!

ऋषिकेश पाण्डेय )

Re: अंजन by vipinmohit
20 March 2012 - 11:04am

Ham par Tirchhi Nazar rahti hai sabki.
Kyu dare, ham thode na kisi ki Jageer hai.
Thoda hi likh pate hai, aur kya kare.
Ham 'Anjan' hai, thode na koi Meer hai.

Re: अंजन by vipinmohit
20 March 2012 - 9:12am

Anjan - A Book written by Vivek Anjan Shrivastava.
A book about Life, Love, Friendship, Home and specially about emotions.

I liked this very much. each word saying a lot, you just need to feel that.

Regards,
Vipin Mohit Shrivastava

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